…तो क्या विश्वविद्यालयों में सीटें घटाकर और उन्हें बंद करके अच्छे दिन लाएगी मोदी सरकार!


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नई दिल्ली। पीएम मोदी अपने भाषणों में छात्रहितों की बात करते नजर आते हैं, सरकार बनाने के बाद पीएम मोदी ने अच्छे दिन लाने का वादा किया था। लेकिन केंद्र सरकार को अच्छे दिन शायद शिक्षा के द्वार बंद करने में नजर आ रहे हैं। केंद्र में मोदी की सरकार बनने के बाद पिछले तीन साल में दो विश्वविद्यालय बंद हो गए वहीं ज्यादातर विश्वविद्यालयों में इस साल से कई कोर्सों की सीटें 80 प्रतिशत तक कम कर दी गई हैं।

देश के टॉप विश्वविद्यालय जेएनयू में भी एमफिल और पीएचडी की सीटें 970 से 102 तक घटा दी गई हैं। जिसके बाद पिछले कई दिनों से वहां के टीचर और स्टूडेंट प्रोटेस्ट कर रहे हैं। यूजीसी गजेट के लागू होने की वजह से इस साल जेएनयू एमफिल और पीएचडी के लिए सिर्फ 102 एडमिशन करेगा, जबकि पिछले सेशन यूनिवर्सिटी ने 970 स्टूडेंट्स लिए थे।

टीचर्स का कहना है कि यूजीसी के दो कदम से सीटों में बड़ी तादाद में कमी हुई हैं, पहला स्कॉलर-टीचर रेश्यो तय करने और दूसरा सुपरवाइजर की कटेगरी तय करके। गजेट के मुताबिक, प्रोफेसर 8, असोसिएट प्रोफेसर 6 और असिस्टेंट प्रोफेसर 4 पीएचडी स्टूडेंट्स को गाइड कर सकते हैं। एमफिल के कॉन्स्टिट्यूशन अमेंडमेंट पर आधारित सेंट्रल एजुकेशनल इंस्टिट्यूशंस (सीईए) एक्ट 2006 की फिक्स सीटों को कैसे कम कर सकता है?

स्टूडेंट्स और टीचर्स की मांग है कि एडमिशन में रिजर्वेशन के लिए लाए गए इस एक्ट को कायम रखा जाए। टीचर्स का कहना है कि यूनिवर्सिटी के सभी एक्ट बने रहने जरूरी हैं, क्योंकि हर यूनिवर्सिटी के स्ट्रक्चर के हिसाब से उसकी जरूरतें अलग होती हैं, जिसे देखते हुए सभी यूनिवर्सिटी में बिल्कुल एक सी पॉलिसी लागू नहीं की जा सकती, कुछ बदलावों का प्रावधान जरूरी है।

वहीं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के डेटा के मुताबिक पिछले तीन साल में दो विश्वविद्यालय बंद किए गए हैं। ये विश्वविद्यालय मेघालय स्थित ईआईएलएम विश्वविद्यालय और सीएमजे विश्वविद्यालय हैं।

मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री महेन्द्र नाथ पांडेय ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी। मंत्री ने बताया कि सीएमजे विश्वविद्यालय के खिलाफ शिकायतें मिलने के बाद इसे मेघालय सरकार ने भंग कर दिया।

हालांकि, विश्वविद्यालय ने राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ मेघालय उच्च न्यायालय का रुख किया जिसने राज्य सरकार के आदेश को निरस्त कर दिया। मेघालय सरकार ने इसके जवाब में उच्चतम न्यायालय का रुख किया और यह विषय न्यायालय के विचाराधीन है। मंत्री ने बताया कि यूजीसी ने यह जानकारी भी दी है कि ईआईएलएम विश्वविद्यालय दिसंबर 2014 से बंद है। उन्होंने बताया कि सिक्किम सरकार ने कहा है कि ईआईएलम विश्वविद्यालय के मौजूदा छात्रों को दूसरे स्थानों पर भेजा गया है।


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